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Chhattisgarh

2021 का प्रतिवेदन क्रमांक 2 -सामान्य, सामाजिक व आर्थिक क्षेत्रों तथा सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों पर प्रतिवेदन, छत्तीसगढ़ शासन

दिनांक जिस पर रिपोर्ट की गई है:
Fri 30 Jul, 2021
शासन को रिपोर्ट भेजने की तिथि
सरकार के प्रकार
राज्य
क्षेत्र उद्योग एवं वाणिज्य,कृषि एवं ग्रामीण विकास,शिक्षा, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण,बिजली एवं ऊर्जा

अवलोकन

विहंगावलोकन
राज्य विधानमण्डल के समक्ष रखे जाने हेतु छत्तीसगढ़ के राज्यपाल को प्रस्तुत करने के लिए 31 मार्च 2019 को समाप्त हुए वर्ष के लिए छत्तीसगढ़ शासन से संबंधित यह प्रतिवेदन तैयार किया गया है। इस प्रतिवेदन में दो भाग है : 
भाग-एक में भारत के संविधान के अनुच्छेद 151 के अधीन राज्य विधानमण्डल के समक्ष रखे जाने हेतु सामान्य, सामाजिक एवं आर्थिक क्षेत्रों के अंतर्गत छत्तीसगढ़ शासन के विभागों की लेखापरीक्षा के परिणामों की चर्चा की गई है। इसमें छत्तीसगढ़ शासन के पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग, लोक निर्माण विभाग और महिला एवं बाल विकास विभाग के निष्पादन लेखापरीक्षा निष्कर्षों तथा जल संसाधन विभाग के अनुपालन लेखापरीक्षा निष्कर्षों के महत्वपूर्ण परिणामों को शामिल किया गया है।
भाग-दो इस प्रतिवेदन में पीएसयूज के लेखापरीक्षित/प्रावधिक लेखें तथा उन वर्षों से संबंधित प्रस्तुत की गई जानकारियाँ है जिनके लेखे बकाया थे। पीएसयूज के लेखों के अंतिमीकरण/पुनरीक्षण का प्रभाव, यदि कोई हो, भविष्य के प्रतिवेदनों में  परिलक्षित होगा।
इस प्रतिवेदन में उन मामलों का उल्लेख किया गया है जो वर्ष 2017-19 की अवधि के दौरान नमूना लेखापरीक्षा के दौरान ध्यान में आये, साथ ही साथ गत वर्षों के ऐसे मामले जो ध्यान में तो आये थे परंतु पूर्व वर्षों के लेखापरीक्षा प्रतिवेदनों में प्रतिवेदित नहीं किये जा सके थे। 2017-19 के बाद की अवधि से संबंधित मामलों को भी सम्मिलित किया गया है, जहाँ आवश्यक रहा हो।
        भाग-एक
प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण पर निष्पादन लेखापरीक्षा
राज्य सरकार द्वारा आवास सुरक्षा लक्ष्य के तारतम्य में राज्य विशिष्ट योजना की रूप रेखा तैयार नहीं की गई। योजना द्वारा केवल 65 प्रतिशत पात्र हितग्राहियों को ही लाभ पहुंचाया गया, जबकि विभाग द्वारा चिन्हित 35 प्रतिशत अतिरिक्त हितग्राही, सितम्बर 2020 की स्थिति में, स्थायी प्रतीक्षा सूची से बाहर ही रहे। भारत सरकार से प्राप्त राशि के राज्य नोडल खाता में हस्तांतरण में देरी (6 से 225 दिवस तक) पायी गई एवं राज्य सरकार द्वारा तीन वर्षों की अवधि 2016-19 में रू. 896.22 करोड़ कम जारी किए गए। 43,930 (15.19 प्रतिशत) हितग्राहियों को आवास निर्माण पश्चात भी पूर्ण सहायता राशि का भुगतान नहीं किया गया। हितग्राहियों को प्रथम किश्त जारी करने में अधिकतम 812 दिवस तक की देरी पायी गई एवं सहायता राशि का गलत बैंक खाते में हस्तांतरण करना भी पाया गया।
राज्य मार्गों एवं मुख्य जिला मार्गों के निर्माण की निष्पादन लेखापरीक्षा
यद्यपि शासन ने वर्ष 2002 में सड़क नीति की रुपरेखा तैयार कर ली थी किन्तु लेखापरीक्षा की अवधि तक उसे अपनाया नहीं गया था। विभाग के पास सड़कों के चयन, वित्तपोषण एवं विभिन्न क्रियान्वयन एजंेसियों के माध्यम से कार्यान्वयन की प्राथमिकता तय करने की एक पारदर्शी प्रणाली का अभाव था। रोड डेटाबेस तथा सड़क प्रबंधन प्रणाली के अभाव में सड़क कार्यों के लिए व्यापक योजना स्थापित किया जाना अभी तक शेष था।वन विभाग से पूर्व अनुमति प्राप्त किये बिना तथा कुछ मामलों में संबंधित एजेन्सियों से अनुमति प्राप्त किये बिना ही सड़क कार्य प्रारंभ कर दिये गये थे।
निधियों के गलत वर्गीकरण, प्रशासनिक स्वीकृति प्राप्त किये बिना कार्यों को बजट में सम्मिलित किये जाने, विचलनों की स्वीकृतियों तथा समयवृद्धि प्रदान करने में अनियमितताओं के प्रकरण पाये गये थे। प्राक्कलन तैयार करने में कमियों, इंडियन रोड कांग्रेस विशिष्टियों का पालन न किये जाने एवं ठेकेदारों को अनुचित लाभ दिये जाने के प्रकरण भी पाये गये थे। सड़क सुरक्षा लेखापरीक्षा स्वतंत्र एजेन्सियों से निष्पादित नहीं करायी गई थी।
समेकित बाल विकास सेवाएँ पर निष्पादन लेखापरीक्षा    
समेकित बाल विकास सेवाएँ निष्पादन लेखापरीक्षा से पता चला कि 2014-15 से 2018-19 की अवधि के दौरान 0-6 वर्ष आयु समूह के 30.72 लाख बच्चों (135.42 लाख में से) और 3.81 लाख गर्भवती एवं शिशुवती माताओं (26.13 लाख में से) को पूरक पोषण वितरण नहीं किया गया था।लेखापरीक्षा अवधि के दौरान योजना के लाभार्थियों की वास्तविक संख्या में लागातार गिरावट हो रही थी। भारत सरकार द्वारा निधियों की स्वीकृति के बावजूद, लाभार्थियों और आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं/सहायिकाओं दोनों के आधार सीडिंग का कार्य पूरा नहीं किया गया था।
नमूनों को देर से भेजने या प्रयोगशाला से आरटीई पैकेट का जाँच प्रतिवेदन प्राप्त नहीं होने के कारण एवं राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम (एनएफएसए) मानक से पोषक मात्रा में सहनशीलता की सीमा में विचलन के कारण विभाग दिशा-निर्देशों के अनुसार भोजन की गुणवत्ता सुनिश्चित करने में असमर्थ था। प्रारंभिक बाल्यावस्था देखभाल और शिक्षा पाठ्यक्रम दो वर्षो से अधिक की देरी से क्रियान्वित किया गया था तथा आंगनबाड़ी केन्द्रों हेतु मेडिसिन किट की खरीदी नहीं की गई थी।
आंगनबाड़ी केन्द्रों में मानकों के अनुरूप आधारभूत संरचना और उपकरणों की उपलब्धता में कमी थी तथा मूलभूत सुविधाओं जैसे पीने का पानी, शौचालय, खेल का मैदान, भंडार कक्ष, रैम्प, बिजली, खाना बनाने तथा खिलाने के बर्तन, आवश्यक दवाई तथा स्वास्थ्य की निगरानी हेतु सामग्री की कमियाँ आंगनबाड़ी केन्द्रों के संचालन में बाधा थी। 5,915 आंगनबाड़ी भवनों के निर्माण में देरी तथा जीर्ण अवस्था एवं बसाहट से अधिक दूरी के कारण 1,487 आंगनबाड़ी भवनों के उपयोग में नहीं आने से केवल 37,407 आंगनबाड़ी केन्द्र स्वयं क भवन में संचालित थे। आंगनबाड़ी केन्द्रों की निगरानी में कमी थी जैसा कि बाल विकास परियोजना अधिकारियों और पर्यवेक्षकों के क्षेत्र भ्रमणों में अत्यंत कमी से स्पष्ट है।
अनुपालन लेखापरीक्षा टिप्पणियाँ
इस प्रतिवेदन में शामिल दो लेखापीक्षा पैराग्राफ जल संसाधन विभागों से संबंधित हैं और इसमें निष्फल व्यय और ठेकेदार को अनुचित लाभ जैसी कमियां हैं। 
भाग-दो
इस प्रतिवेदन में शामिल अनुपालन लेखापरीक्षा टिप्पणियां राज्य के सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों द्वारा स्थापित नीतियांे, नियमों और विनियमों के गैर-अनुपालन के मामलों को उजागर करती हैं जिनके वित्तीय निहितार्थ थे । इस प्रतिवेदन में शामिल दो लेखापरीक्षा कंडिकाएं छत्तीसगढ़ राज्य औद्योगिक विकास निगम लिमिटेड से संबंधित हैं, जिसमें निजी पक्ष से सेवा शुल्क एवं पट्टा किराया की कम वसूली तथा एक निजी पार्टी से भूमि प्रीमियम एवं पट्टा किराए के कम संग्रहण पर अवलोकन शामिल है।

 

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